वक्त की याद
साल की आखिरी शाम हाथ में लिए मोबाइल की कीबोर्ड पर टाइप करते हुए # उसका ध्यान अचानक सामने की दीवार पर टंगे कैलेंडर की ओर जाने पर एहसास हुआ, "अरे! यह तो कल बदलने वाला है" । शायद कैलेंडर भी मायूस होकर उसे निहार रहा था ।सोंच रहा था "अब मेरी जरूरत आज भर तक की है, कल से मेरी जगह एक नया कैलेंडर आएगा । सब उसे देखेंगे , उस पर हिसाब किताब ,लेखा जोखा किया करेंगे ।" # वह कैलेंडर के #खास दिनों को देखकर अपने बीते हुए साल के यादगार पलों में खो गया।कितना कुछ बदल दिया इस २०१९ ने । मेरे अज़ीज़ दोस्त इस गर्मी ने दूर कर दिए । ये सावन उम्मीदें ले गई । उसके बाद के महीनों ने भी कोई कसर बाकी न रखी ।कहीं लोगों का साथ मिला तो कहीं सबक । ये #दशक मिलने-बिछड़ने का दौर रहा । न जाने इस मिलने-बिछड़ने के बाद का मिलना नये अंग्रेजी दशक के कैलेंडरों में लिखा है भी या नहीं? पर उन लम्हों की यादें और उन यादों को याद कर मुस्कुराने का रिवाज़ आजन्म लगा हुआ है। बस ऐसे ही "बीते यादों को ज़िन्दगी के पन्नों से निकालकर वर्तमा...